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Saturday, June 20, 2009

पई चुई यी की कविताएँ

यी मठ पर
खाली वक्त में
झरने के पास बैठा
खेल रहा हूँ रोडियों से
आस पास खोजता हूँ जंगली फूल
सुनता हूँ चिडियों की चहचहाहट
चारों तरफ़ है
वासंती झरनों की गूँज

शुरुवाती वसंत

दिन कुनकुने होते जा रहे हैं
बर्फ पिघलती जा रही है
लगातार फैलता प्रकाश है धरती पर
बर्फ हो रही है गायब
एक ही चीज़ है जिसे वसंत बदल नहीं पाया
मेरी कनपटियों के पाले जैसी सफेदी वाले बाल ।

चीनी कवि पाई छु यी : चीनी कवि ; रचनाकाल (७७२ -- ८४६)